फागुनके सम्झनम !
फागुनके एक्ठो शान्त दिन रहे। पुनर्वास नगरपालिका–१ म पर्ना ढक्का गाउँ पुगेबर गाउँक आपने फरक संसार देखे मिळ। बजाररक भीरभार ओ कलकल बलबलसे डुर, फराक गल्लिक डुनुओर फैलल घरै घर, हरियर ओ फराक बड्रीले गाउँहे सहजल ओ सुग्घुर बनैलेरहे ।
गाउँक गल्लिम आगेओर परगा सर्टिजाबर कहरु पुरान मौलिक घर देखपरल, कहरु लावा मेरिक घर देख्गैल। सडकके पाँजरे लगाइल रुखुवा बिरुखुवा ओ अँगन खेतुवाके हरियालीले गाउँके प्राकृतिक सौन्दर्यहे अउर सोभा बह्रेले रहे । कहरु नरिवलके ढेङ्ग रूखवा बड्रिओर फैलल रहे कलसे कहरु भारि झबल्यार रुखुवा डग्गर छोपल सिट्टर करैले रहे ।
फागुनके मौसम हुइलक मारे वातावरणमा फरक चम्पन रहे । जार ढितेसे बिदा हुइटहर ओ गर्मी जुन आपने आगमनके संकेत देहभिरल रहे । भँटहिया बड्रिकटरे गाउँक शान्त सरकेम नेगेंबर मन कहटहे कुछबेर रुकलिउँ ।
ढक्का गाउँक इ दृश्य कौनो भारी आकर्षण वा बनावटी सजावट नैरहे। तर गाउँक यहे सरलता मन छुना खालके रहे । घरक पँजरे रहलरुखुवा बिरुखुवा, बोटबिरुवा, सरकेक किनारमे खाली जमिन, बिजुलीक पोल, दुरसम्म फैलल पक्की रोड ओ शान्त वातावरण इ सबचिजसे गाउँक वास्तविक जीवनके एकटो सुन्दर चित्र छापगैल रहे ।
मै उहाँ कुछ बेर समय किल रहेपैनु तर उ दृश्यसे मनम लाम्मा समय रहना सम्झना छोरगैल । यात्रा कलक केवल नयाँ ठाउँ पुग्ना किल नै हो कहुन: कबुकाल सरकेम देखापरल सामान्य दृश्यफेन मनभिट्टर असाधारण सम्झना बनादेहट । 🌺🌼


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